अहिष्णुता की लहर पर रोकः धार्मिक स्वतंत्रता प्रोत्साहित करने के लिए दक्षिण एशियाई पत्रकारों का नेटवर्क

South Asia Journalism Workshop

दक्षिण एशिया में मीडिया परिदृश्य जीवंत और जोशपूर्ण है, लेकिन यहां धर्म को लेकर कवरेज अक्सर सीमित ही रहता है और इस विषय पर खबरों की खोज-बीन महज बड़ी राजनैतिक घटनाओं के दायरे में सिमटी होती है। सरकार पत्रकारों को अक्सर नियंत्रित करती रहती है, ये पत्रकार कई बार अपने काम को लेकर चरमपंथियों और धर्मनिरपेक्षतावादी समूहों के निशाने पर रहते हैं और ऐसे समूह पत्रकारों को अक्सर धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रकाश डालने वाले से रोकते हैं।

आईसीएफजे भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के पत्रकारों और डिजिटल क्षेत्र के असरदार लोगों को एक मंच पार लाएगा जहां इस समूह को धार्मिक उत्पीडन को हवा देने वाले कारणों पर प्रकाश डालने का मौका मिलेगा।   

कार्यक्रम का मकसद एक ऐसा स्थायी क्षेत्रीय नेटवर्क तैयार करना है, जो विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार समर्पित हो कर काम करते हुए अपने पाठकों, दर्शकों या श्रोताओं के लिए समाचार प्रस्तुत करे।  

कार्यक्रम संबंधी जानकारी

इस कार्यक्रम में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका से भाग लेने वाले पत्रकारों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के असरदार चेहरों, ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया पर सक्रिय कार्यकर्ताओं और आम नागरिक पत्रकारों (सिटिजन जर्नलिस्ट्स) को व्यक्तिगत प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और आर्थिक अनुदान जैस सुविधाएं हासिल होंगी

इस कार्यक्रम में धार्मिक स्वतंत्रता विषय को कवर करने के संबंध में नीचे लिखी गतिविधियां शामिल होंगी : 

  • आठ सप्ताह के ऑनलाइन कोर्स में धर्म पर रिपोर्टिंग की बुनियादी बातें शामिल होंगी

  • व्यावहारिक दक्षता संबंधी प्रशिक्षण के लिए 5 दिन की कार्यशाला

  • ऑनलाइन कोर्स और वर्कशॉप यानी कार्यशाला के प्रतिभागियों के लिए विशेषज्ञों का ऑनलाइन मार्गदर्शन

  • कार्यक्रम में भाग लेने वाले पत्रकारों को रिपोर्टिंग के लिए अनुदान

  • प्रतिभागियों की स्टोरीज़ को प्रस्तुत करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता पर विभिन्न वेबिनार्स का आयोजन

  • धर्म पर रिपोर्टिंग के लिए साधन (टूलकिट) तैयार करना

यह ऑनलाइन प्रशिक्षण कोर्स पांच भाषाओं – अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी, तमिल और सिंहली भाषाओं में आयोजित होगा।